धुंध, सिगमंड फ्रायड और शाम का सूर्योदय :दूसरा भाग





"क्या सोच रहा है तू ?" अलग सिगरेट का धुंआ मेरे मुंह पर छोड़ता है | मैं जैसे सोते से जगा , उसके बारे में सोचते सोचते मैं काफी दूर किसी और पल में आ गया हूँ |
"अभी तुझे देख रहा था काफी देर से , कुछ सोच रहा था तू ?" मैं हार गया था सो आखिर पूछना पड़ा | अलग अभी भी मुस्कुरा रहा था | मैं समझ गया था कि वो मुझे पढने की कोशिश लगातार कर रहा है |
"कैंटीन चलेगा ?"
मैं चौंका, फिर संयत हो गया | सोचा, इसीलिए तो वो अलग है | ये सब इतनी जल्दी हुआ कि खुद मुझे भी पता नहीं चला |
"इस वक़्त ? बाहर सर्दी हो रही है बहुत |"
"चल न यार !"
उसे पता था कि उसके अनुरोध को मैं टाल नहीं पाऊंगा | असल में मैं खुद भी बाहर जाकर मौसम का मजा लेना चाहता था | मैं अपनी टोपी और जैकेट लेने के लिए रूम पर आया | अलग भी मेरे साथ साथ आ गया |

आकाश और रजत रजाई के अन्दर घुसकर सोने की पिछले दो घंटे से कोशिश कर रहे थे , लेकिन कामयाब अभी तक नहीं हुए |
"साले ! तूने ही तो कहा था उससे जाके कहने के लिए |"
"और तू बोल आया ? कमीने !!!"
"और क्या करता ? भाई ... "आकाश रजत को हिलाता है |
"सोने दे साले अब | अब सिर्फ नींद बची है मेरे पास , इज्ज़त तो तूने लुटवा दी सरे बाज़ार |"
"भाई... पहली बार तो अपने भाई को प्यार हुआ है |"
"किससे? किससे ?" मैंने बातचीत में शामिल होने की कोशिश की |
"ओये मणिभ ! इधर आ !!! तेरे को एक बात बताता हूँ |" आकाश चिल्लाया | "रजत को फर्स्ट इयर की लड़की पसंद आ गयी एक |"
"कौन है ?"
"वैदेही चौहान"
"ये कौन है ? कहाँ की है ?"
"कोटद्वार है भाई का ससुराल !" आकाश ने सोते हुए रजत पर एक धौल जमाते हुए कहा |
"कैसी है दिखने में ?" अलग बोला | लड़की कैसी दिखती है वैसे, अलग को इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है , मैं जानता हूँ कि वो सिर्फ बातचीत में शामिल होने के लिए पूछ रहा है | कोई और वक़्त होता तो हम सब शायद अलग को अचरज भाव से देखते , लेकिन आज आकाश इतना उत्साहित था कि उसने इस पर ध्यान नहीं दिया |
"मस्त है यार !!!"
"ओये तमीज से ! " रजत आँख बंद किये हुए बड़बड़ाया |
"मतलब बहुत अच्छी लड़की है |"
"तुझे तो अच्छी ही लगेगी ... कोई है ऐसी जो नहीं लगती ?" अलग ने होंठ टेढ़े कर लिए , "तू बता रजत कैसी है ?"
"ठीक ठीक है यार " रजत ने अब आँखें खोल दी |
अलग जोश में उछल सा पड़ा , "चल ...चल रजत !!! आज तुझे प्यार हुआ है इसी ख़ुशी में तू कैंटीन चल के कुछ खिलायेगा |"
वो दोनों एक पल को हैरान हुए | फिर दोनों ने मशीनी अंदाज में रजाई एकसाथ मुंह के ऊपर डाल ली | "पागल है क्या ??? बाहर बहुत ठण्ड है "
मुझे पता था कि थोड़ी देर में ऐसा होने वाला है | अलग हमेशा अजीब प्रस्ताव रखता है , जो कि एक तरह के रोमांचक होते है | कभी -कभी बचकाने, तो कभी खतरनाक, और अक्सर उसके इस तरह के प्रस्ताव का मैं समर्थन करता हूँ | डरते डरते कि अगर लोगों को ये सब पता चल जाए तो मैं भी अलग मान लिया जाऊँगा | रजत तभी समर्थन करता है , जब उसे कुछ क्लिक करता है | लेकिन अगर वो इसका समर्थन करेगा तो वो इस प्रस्ताव में इतने फेरबदल करेगा कि वो अलग का ही नहीं रहेगा | और, आकाश अलग का कभी किसी बात पर समर्थन नहीं करता |

मैं और अलग , हम दोनों गर्म कपड़े पहनकर कैंटीन की ओर चलने लगे हैं | गैलरी में सिगरेट के ठूंठ पड़े हैं | अलग को रूम के अन्दर सिगरेट पीने की मनाही है | खिड़की पर लगे कांच टोपोग्राफी के लिए निकाले जा चुके है | इसलिए हवा अन्दर हड्डियों में घुस रही है | हमारे सामने वाले रूम का दरवाजा अचानक तेज हवा से खुल गया | सभी लोग पढ़ रहे थे | एकबारगी मेरा मन हुआ कि थोड़ा उनकी पढाई में बाधा डालनी चाहिए | लेकिन , ये तो हमेशा ही पढ़ते रहते हैं , और इस वक़्त उनसे ज्यादा बाधा मेरे काम में आ जाएगी | इस विचार को त्याग दिया | गैलरी के तीसरे और अंतिम कमरे से गुज़रा तो देखा रोहित जिम कर रहा है | इसका तो यही काम है, अगर ये सोने में वक़्त बर्बाद न करे तो उस वक़्त भी शायद ये यही करना पसंद करेगा | मैंने सोचा, मुस्कुराया, और आगे बढ़ गया |

6 टिप्‍पणियां:

सञ्जय झा ने कहा…

मुझे पता था कि थोड़ी देर में ऐसा होने वाला है | अलग हमेशा अजीब प्रस्ताव रखता है , जो कि एक तरह के रोमांचक होते है | कभी -कभी बचकाने, तो कभी खतरनाक, और अक्सर उसके इस तरह के प्रस्ताव का मैं समर्थन करता हूँ | डरते डरते कि अगर लोगों को ये सब पता चल जाए तो मैं भी अलग मान लिया जाऊँगा...........

alag man liye gaye ho basiayl .....

sadar...

a request: apne kabarkhane wale pandeji se bolke 'lapoojhanna' pe lafatoo ko layen?

संजय @ मो सम कौन ? ने कहा…

सारे बंदे unique हैं। अपना छड़ापन याद आ रहा है:)

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

रजाई से निकल कहानी भी कड़कड़ाती ठंड में बढ़ चली।

सोमेश सक्सेना ने कहा…

अच्छी चल रही है कहानी. लेखन शैली प्रभावी है.

Arvind Mishra ने कहा…

अब अंत देखते हैं !

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

आपके यहाँ आकर अच्छा लगा।